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उत्तराखंड में एलपीजी की लगातार आपूर्ति: आईओसीएल…

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उत्तराखंड में एलपीजी की लगातार आपूर्ति: आईओसीएल…

चारधाम यात्रा के दौरान एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की संभावित बढ़ती खपत को देखते हुए उत्तराखंड सरकार की ओर से केंद्र सरकार को अतिरिक्त मांग भेजी जाएगी। यह जानकारी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड उत्तराखंड के राज्य स्तरीय समन्वयक एवं खुदरा बिक्री प्रभाग प्रमुख कृष्ण कुमार गुप्ता ने सोमवार को प्रेस सूचना ब्यूरो देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है। राज्य में उपभोक्ताओं को एलपीजी की निरंतर आपूर्ति की जा रही है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग डिजिटल माध्यमों से करें और अनावश्यक रूप से वितरकों के पास जाने से बचें।

उन्होंने बताया कि गैस के दुरुपयोग और अवैध मोड़ को रोकने के लिए डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड (डीएसी) आधारित एलपीजी वितरण व्यवस्था लागू की गई है। फरवरी 2026 में इसकी हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग 90 प्रतिशत हो गई है। मार्च 2026 से अब तक 3.6 लाख कनेक्शनों में गैस कनेक्शन स्थापित किए गए हैं और 3.9 लाख से अधिक नए पंजीकरण के साथ पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के विस्तार में तेजी आई है।

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उन्होंने बताया कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 80 प्रतिशत आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है। तेल कंपनियां केंद्र और राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं ताकि किसी प्रकार की कमी न हो।

एलपीजी के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि देश में लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात के माध्यम से आती है। सभी रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता से कार्य कर रही हैं और उत्पादन बढ़ाया गया है। उत्तराखंड में उपभोक्ताओं को निरंतर एलपीजी आपूर्ति की जा रही है, हालांकि वर्तमान में लगभग 6.97 दिनों का बैकलॉग है, जिसका मुख्य कारण उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट में रिफिल बुकिंग करना है। लगभग 85 प्रतिशत बुकिंग ऑनलाइन माध्यम से हो रही हैं और डीएसी व्यवस्था का क्रियान्वयन भी लगभग 85 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

राज्य में घरेलू एलपीजी की औसत आपूर्ति लगभग 18 लाख सिलेंडर प्रति माह है। मार्च में जहां प्रतिदिन लगभग 65 हजार सिलेंडरों की आपूर्ति हो रही थी, वहीं वर्तमान में यह घटकर लगभग 56 हजार सिलेंडर प्रतिदिन रह गई है। गैर-घरेलू एलपीजी की औसत आपूर्ति लगभग 1.6 लाख सिलेंडर प्रति माह है। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, होटल-ढाबों, औद्योगिक कैंटीनों और फार्मा क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति दी जा रही है।

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आंकड़ों के अनुसार, 5 अप्रैल को राज्य में 34,448 एलपीजी बुकिंग दर्ज की गई, जबकि उसी दिन 26,595 सिलेंडरों की डिलीवरी की गई। 29 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 2,95,624 बुकिंग और 2,50,344 डिलीवरी हुईं। मार्च 2024 में कुल 14,06,421 बुकिंग और 11,25,546 डिलीवरी दर्ज की गई थीं।

राज्य में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत प्रतिदिन लगभग 5,000 एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं।

ईंधन आपूर्ति की स्थिति के संबंध में बताया गया कि पूरे उत्तराखंड में पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। राज्य में कुल 978 पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं, जिनमें इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड के 431, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के 214, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के 254, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के 28 और नायरा एनर्जी के 51 पेट्रोल पंप शामिल हैं। राज्य में पेट्रोल की औसत उपलब्धता लगभग 60 हजार किलोलीटर और डीजल की लगभग 75 हजार किलोलीटर है।

सिटी गैस वितरण और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में राज्य में पांच कंपनियां कार्य कर रही हैं, जिनमें गेल गैस लिमिटेड , अडानी टोटल गैस लिमिटेड हरिद्वार, नेचुरल गैस प्राईवेट लिमिटेड और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों द्वारा घरेलू पाइप्ड गैस कनेक्शनों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। 1 मार्च से अब तक 1,388 पाइप्ड गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं और कुल उपभोक्ताओं की संख्या 35,589 हो गई है।

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जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य में लगातार निरीक्षण और कार्रवाई की जा रही है। अब तक 5,681 निरीक्षण और 301 छापे मारे गए हैं, जिनमें 16 प्राथमिकी दर्ज की गईं, 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 16 नोटिस जारी किए गए।

पत्रकार वार्ता में बताया गया कि गलत सूचनाओं और फर्जी खबरों को रोकने के लिए जन-जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने सहायता के लिए 112 और 1070 टोल-फ्री नंबर भी जारी किए हैं।

कृष्ण कुमार गुप्ता ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे घबराकर खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। उन्होंने लोगों से डिजिटल माध्यम से एलपीजी बुकिंग करने, भीड़ से बचने, जहां संभव हो वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने और ऊर्जा की बचत करने का भी आग्रह किया।

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